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Paumbhaji Pretty crunchy vegetables

Paumbhaji Pretty crunchy vegetables

Paumbhaji, big and small at all prices. And the best part is that you can add all the vegetables you like. My daughter gets vegetables at a lower price, but also at a lower price. So I must make one day in a month. Mast Chatakedar Bhaji – Butter and lemon marquee, masala bun and tawa pilaf. Mouth watering or not ??

Make this yourself, and tell me what other vegetables you put in it ??

Ingredients :-

  1. 2-3 small potatoes (peel and cut into large pieces)
  2. Cauliflower (take a large samari)
  3. Bowl of peas (folla)
  4. 1 bowl Cauliflower (large chopped)
  5. 1/2 bowl Bit or 1 small bit (peel and cut into small pieces)
  6. 1/2 bowl Carrots (chopped)
  7. Water
  8. 2 tbsp Oil
  9. 2 tbsp Butter
  10. 2 Small Onions (Finely Chopped)
  11. 2-3 cloves of garlic (grate the ginger)
  12. 1-2 green chillies (pasted)
  13. 1 Small capsicum
  14. 5Tomatoes (2 finely chopped – no seeds) and (Puree 2 tomatoes). You can also use readymade
  15. Salt
  16. 2-3 pound vegetable spices
  17. 1 tbsp Chili (take a little more if you eat spicy)
  18. 1 tbsp Long no juice
  19. 1 Chopped lemon
  20. Coriander finely chopped
  21. 1 Become a pack
  22. Bake 2-3 tbsp butter bun
  23. 1/2 tsp Panubhaji masala (to make masala bun)

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Three Mannequin interesting Hindi story Motivational

Maharaja Chandragupta was very fond of toys. He needed a new toy everyday. Even today the Maharaja asks what is new; It turns out that a merchant has come and brought some new toys. The merchant claims that Maharaj or anyone has never seen and will never see such toys till date. Hearing this, Maharaj ordered to call the merchant.

The merchant came and after bowing, took out three effigies from his box and placed them in front of the Maharaj and said that these three effigies are very special in themselves. The looks may look similar but in reality are very unique. The value of the first mannequin is one lakh pieces, the value of the second one thousand pieces and the value of the third mannequin is only one piece.

The emperor looked at the three mannequins carefully. There was no difference in sight, then why the difference in price? This question made Chandragupta very upset. After the defeat, he gave effigies to the councilors and said, tell me what is the difference between them. The councilors turned around and saw the three effigies from all sides, but no one got the answer to solve this trick. When Chandragupta saw that everyone was silent, he asked the same question to his guru and general minister Chanakya.

Madhuri Dixit Ki Kahani Hindi Me Full Information

Chanakya looked at the mannequins very carefully and ordered the court to bring three straws. When the straw came, Chanakya first put a straw in the effigy’s ear. Everyone saw that the straw went straight into the stomach, after a while, the lips of the mannequin moved and then closed. Now Chanakya next put the straw in the second effigy’s ear. This time everyone saw that the straw came out of the other ear and the effigy remained intact. Everyone’s curiosity was increasing by seeing what would happen next. Now Chanakya put the straw in the ear of the third effigy. Everyone saw that the straw was out of the effigy’s mouth and the effigy opened its mouth. The mannequin is moving even as if you want to say something.

Asked by Chandragupta what all these are and why the value of these effigies is different, Chanakya replied.

Rajan, the character always listens and keeps the things to himself and only opens his mouth after confirming them. This is his greatness. We get the same knowledge from the first mannequin and this is why the value of this effigy is one lakh pieces.

Some people are always engrossed in themselves. They ignore everything. They have no desire to wow. Such people never harm anyone. We get the same knowledge from the second mannequin and this is why the value of this effigy is one thousand pieces.

Some people are rough in the ears and light in the stomach. Nobody heard that there was noise in the whole world. They have no knowledge of false truth, just by opening their mouth. This is why the value of this effigy is only one stamp.

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Madhuri Dixit Ki Kahani Hindi Me Full Information

माधुरी दीक्षित उस वक्त सात या आठ साल की रही होंगी जब पहली बार अखबार में उनके कथक नृत्य की तारीफें छपीं। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, ‘उन्होंने गुरु पूर्णिमा के त्यौहार पर एक समारोह में कथक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी थी। उस वक्त एक अखबार के पत्रकार भी वहां मौजूद थे। उन्होंने ही अखबार में वह आलेख लिखा। उस आलेख ने ही मुझे आगे बढ़ने और मेरा लक्ष्य तय करने में बहुत मदद की।’

माधुरी दीक्षित का शुरुआती फिल्मी करियर बहुत ही डगमगाता सा नजर आया। उन्होंने राजश्री प्रोडक्शन में ही फिल्म ‘अबोध’ से अपने करियर की शुरुआत की। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई कमाल नहीं दिखा पाई और ना ही समीक्षकों की नजरों में चढ़ी। हालांकि माधुरी दीक्षित का अभिनय लोगों की नजर में आ चुका था और यहां से उन्होंने अपने करियर की सकारात्मक शुरुआत की। और फिर उन्हें अभी ‘मोहिनी’ और ‘धक धक गर्ल’ का नाम मिलना भी बाकी था।

Madhuri Dixit Ki Kahani Hindi Me

Madhuri Dixit Ki Kahani Hindi Me

हालांकि अपनी पहली फ्लॉप फिल्म के बाद भी माधुरी दीक्षित आवारा बाप, स्वाति, हिफाजत, उत्तर दक्षिण, मोहरे, खतरों के खिलाड़ी और दयावान जैसी फिल्मों में अहम भूमिका निभाती नजर आईं। लेकिन, माधुरी दीक्षित को अभी तक वह कामयाबी नहीं मिली थी जिसकी वह हकदार थीं। यह सभी फिल्में दर्शकों और समीक्षकों दोनों को ही प्रभावित करने में असफल रहीं। लेकिन, इन फिल्मों के साथ माधुरी अपने अभिनय को और तीखा करती हुई जा रही थीं।

फिर उन्हें वह मौका मिला जिसके लिए आज भी माधुरी दीक्षित को याद किया जाता है। एन चंद्रा के निर्देशन में बनी फिल्म ‘तेजाब’ में वह अनिल कपूर के साथ मुख्य भूमिका में नजर आईं। हालांकि अनिल कपूर के साथ वह फिल्म ‘हिफाजत’ में भी नजर आ चुकी थीं लेकिन यह उनकी पहली फिल्म थी जिसे दर्शकों और समीक्षकों ने भी हाथों हाथ लिया। इस फिल्म में आकर माधुरी दीक्षित ने लोगों को एक दो तीन… की गिनती सिखाई और इस प्रस्तुति ने उन्हें ‘मोहिनी’ के रूप में सदा के लिए अमर कर दिया।

फिल्म ‘तेजाब’ के बाद तो जैसे माधुरी दीक्षित के लिए लॉटरी निकल पड़ी थी। वह लगातार कुछ ऐसी फिल्मों का हिस्सा रहीं जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर हंगामा मचा दिया था। चाहे हम बात करें ‘राम लखन’ की या फिर मिथुन चक्रवर्ती के साथ ‘प्रेम प्रतिज्ञा’ की। और फिर उनकी फिल्म ‘त्रिदेव’ को तो कौन भूल सकता है? इन सभी फिल्मों में माधुरी दीक्षित का एक अलग-अलग रूप देखने को मिला। ये सारे रूप भी माधुरी दीक्षित के प्रशंसकों को बहुत पसंद आए।

माधुरी दीक्षित ने अब तक अपने करियर की लगभग 12 फिल्में में ही की थीं और अब तक वह दो फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार के लिए नामित हो चुकी थीं। कई सुपरहिट फिल्में देने के बाद वह समय आया जब माधुरी इंदर कुमार की फिल्म ‘दिल’ में आमिर खान के साथ नजर आईं। इस फिल्म में आमिर खान के साथ उनकी जोड़ी ऐसी जमी कि दर्शकों ने इस रोमांटिक फिल्म के लिए चारों तरफ हाहाकार मचा दिया। यह पहली फिल्म रही जिसके लिए माधुरी दीक्षित को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया।

ऐसा नहीं है कि माधुरी दीक्षित की हर एक फिल्म बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रही थी। फिल्म ‘दिल’ और ‘साजन’ तक की दूरी तय करने में उनकी कई फिल्मों ने निराश भी किया। हिट फिल्मोंं ‘बेटा’ और ‘खलनायक’ के बीच में भी उन्होंने कई फ्लॉप फिल्मों में काम किया। उस वक्त कुछ समीक्षकों ने कहा कि अब माधुरी का करियर ढलान पर है। लेकिन, फिर उनके हिस्से आई राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’। इस फिल्म ने माधुरी के लिए इतिहास रच दिया। आजकल जो अभिनेता और अभिनेत्रियों को बराबर पैसे पाने की बात होती है, इस फिल्म में उन्होंने उसको उल्टा ही कर दिया था। माधुरी दीक्षित को इस फिल्म में मुख्य अभिनेता सलमान खान से भी ज्यादा पैसे मिले थे। इसी के साथ उन्होंने सभी आलोचकों का मुंह बंद कर दिया था।

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हिंदी सिनेमा के लिए यह भी एक रिकॉर्ड है कि माधुरी दीक्षित इकलौती ऐसी अभिनेत्री हैं जो अभी तक अपने अभिनय के लिए 19 बार फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित हो चुकी हैं। इनमें से वह चार फिल्म दिल, बेटा, हम आपके हैं कौन और दिल तो पागल है में सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर अवार्ड जीत चुकी हैं। वही संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘देवदास’ में चंद्रमुखी का किरदार निभाने पर उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

एक समय आया जब माधुरी दीक्षित को फिल्में मिलना कम हो गईं। इसलिए उन्होंने शादी करने की ठानी। जब वह फिल्म ‘खलनायक’ में संजय दत्त के साथ नजर आईं थी, तब यही सोचा जा रहा था कि वह संजय दत्त से ही शादी करेंगी। लेकिन जब मुंबई बम धमाकों में संजय का नाम आया तो उन्होंने संजय से शादी करने का इरादा त्याग दिया। बाद में उन्होंने अमेरिका के एक जाने-माने डॉक्टर श्रीराम नेने से शादी कर ली। इस शादी से उन्हें दो बच्चे भी हैं। जब माधुरी से श्रीराम नेने से शादी करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा ‘श्रीराम खाना बहुत अच्छा बनाते हैं इसलिए मैंने उनसे शादी की।’

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धर्मराज दशमी व्रत रखने का महत्व – जानिए महत्व और कहानी

धर्मराज दशमी व्रत रखने का महत्व : सबसे पहले युधिष्ठिर ने अपने खोए हुए भाइयों को पाने के लिए यक्ष की कृपा से यह व्रत रखा था। इस व्रत के संबंध में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया था। यदि किसी का यात्रा पर गया पति किसी कारणवश लौट नहीं पा रहा है तो पत्नी को यह व्रत रखना चाहिए। वैकुंठ में जाने की इच्छा से भी यह व्रत रखा जाता है।

इस व्रत को रखने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कन्याएं यह व्रत रखती हैं तो उन्हें सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है। मान्यता अनुसार रोगी रखता है तो रोग दूर हो जाता है। पुत्र की कामना, अच्छी खेती, अच्छे राजकार्य के लिए भी यह व्रत रखा जाता है।

कहानी : पुराणों में धर्मराजजी की कई कथाएं मिलती हैं उनमें से एक कथा ज्यादा प्रचलित है। कहते हैं कि एक ब्राह्मणी मृत्यु के बाद यम के द्वारा पहुंची। वहां उसने कहा कि मुझे धर्मराज के मंदिर का रास्ता बताओ। एक दूत ने कहा कि कहां जाना है? वो बोली मुझे धर्मराज के मंदिर जाना है। वह महिला बहुत दान पुण्य वाली थी। उसे विश्वास था कि धर्मराज के मंदिर का रास्ता अवश्‍य खुल जाएगा। दूत ने उसे रास्ता बता दिए। वहां देखा कि बहुत बड़ा सा मंदिर है।

वहां हीरे मोती जड़ती सोने के सिंहासन पर धर्मराज विराजमान है और न्यायसभा ले रहे हैं। न्याय नीति से अपना राज्य सम्भाल रहे थे। यमराजजी सबको कर्मानुसार दंड दे रहे थे। ब्राह्मणी ने जाकर प्रणाम किया और बोली मुझे वैकुण्ठ जाना हैं। धर्मराजजी ने चित्रगुप्त से कहा लेखा–जोखा सुनाओ। चित्रगुप्त ने लेखा सुनाया। सुनकर धर्मराजजी ने कहां तुमने सब धर्म किए पर धर्मराजजी की कहानी नहीं सुनी। वैकुण्ठ में कैसे जाएगी?

महिला बोली, ‘धर्मराजजी की कहानी के क्या नियम हैं? धर्मराजजी बोले, ‘कोई एक साल, कोई छ: महीने, कोई सात दिन ही सुने पर धर्मराजजी की कहानी अवश्य सुने। फिर उसका उद्यापन कर दें। उद्यापन में काठी, छतरी, चप्पल, बाल्टी रस्सी, टोकरी, लालटेन, साड़ी ब्लाउज का बेस, लोटे में शक्कर भरकर, पांच बर्तन, छ: मोती, छ: मूंगा, यमराजजी की लोहे की मूर्ति, सोने की मूर्ति, चांदी का चांद, सोने का सूरज, चांदी का सातिया ब्राह्मण को दान करें। प्रतिदिन चावल का सातिया बनाकर कहानी सुने।

यह बात सुनकर ब्राह्मणी बोली, हे धर्मराज मुझे 7 दिन वापस पृथ्वीलोक पर भोज दो। मैं कहानी सुनकर वापस आ जाऊंगी। धर्मराजजी ने उसका लेखा–जोखा देखकर 7 दिन के लिए पुन: पृथ्वीलोक भेज दिया। ब्राह्मणी जीवित हो गई। ब्राह्मणी ने अपने परिवार वालों से कहा, मैं 7 दिन के लिए धर्मराजजी की कहानी सुनने के लिए वापस आई हूं। इस कथा को सुनने से बड़ा पुण्य मिलता है। उसने चावल का सातिया बनाकर परिवार के साथ 7 दिनों तक धर्मराजजी की कथा सुनी। 7 दिन पूर्ण होने पर धर्मराजजी ने अपने दूत भेजकर उसे वापस ऊपर बुला लिया। अंत में ब्राह्मणी को वैकुण्ठ में श्रीहरी के चरणों में स्थान मिला।

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ऐसी डरावनी कहानी आपने कभी नहीं पढ़ी होगी

दोस्तो हम दिन कुछ न कुछ पोस्ट डालते ही रहते है | लेकिन आज हम एक कहानी लिख रहे है जो आपको जरूर पसंद आएगी | तो शुरू करते है|

 दरसल ये पंद्रह साल पहले की बात होगी। हमारी कहानी के नायक हैं रमेश और सुरेश। बेशक ये काल्पनिक नाम हैं। लेकिन रमेश और सुरेश खास दोस्त हैं। मेरा मतलब बहुत टाइट है। दोनों ड्राइवर। दोनों ने ‘लाइफ’ में ड्राइवर बनने का सपना देखा। इसी तरह, उन्होंने अपने सपनों को सच कर दिखाया।

दोनों को बोरीवली के एक बड़े कॉल सेंटर के ड्राइवर के रूप में काम पर रखा गया था। जैसा कि आप जानते होंगे कि कॉल सेंटर 24 घंटे खुले रहते हैं। कंपनी की गाड़ियों के कर्मचारी रात-रात भर घर जाते हैं और वापस आते हैं। तो यह भी नौकरी पैकेज में एक आकर्षण है।

तो अचानक ऐसा क्या हुआ कि इस कंपनी का कोई भी ड्राइवर दोपहर 12.30 बजे बोरीवली से वसई-विरार जाने के लिए तैयार नहीं हुआ। वास्तव में, एक कार जितनी लंबी होती है, उतना अधिक राजस्व एक चालक बनाता है। फिर भी, सभी ड्राइवर दूसरी तरफ ड्रॉप करने के लिए कहते हैं। उन्होंने कॉल सेंटर मैनेजर का भी प्रबंधन किया।

लेकिन केवल रमेश और सुरेश जानबूझकर इस लंबी गिरावट के दौर की मांग कर रहे थे। कारण यह है कि दोनों ‘साहसी’ थे और वे राक्षसों से डरते नहीं थे! मेरा मतलब है?

इसका मतलब है कि रात में, राजमार्ग पर, फव्वारे के चालक को एक भूत दिखाई दे रहा था। खासतौर पर रमेश और सुरेश को तो वह हमेशा ही नजर आता था। वह इन भूतों की कहानियों के बारे में कार्यालय को बताती थी। यह भूत रात में बाइक से पुल पार कर रहे एक युवक के बारे में था। हो सकता है कि उसे किसी बड़े वाहन ने उड़ा दिया हो। हेलमेट पहने हुए ही चालक की मौत हो सकती है। तो उसका भूत भी हेलमेट पहने घूमता रहता। ऐसी बात थी।

भले ही हर कोई इस भूत से डर गया था, लेकिन कार्यालय में बहुत ज्यादा ड्राइवर नहीं है! उन्होंने एक बार रमेश सुरेश को भूत दिखाने के लिए चुनौती दी थी। फारुख हर समय अपने ड्राइवर के दूसरे ड्राइवर दोस्तों को मारता था।

रमेश सुरेश ने उन्हें कुछ दिनों के लिए निलंबित कर दिया।

‘मैं तुम्हें दिखाता हूँ। लेकिन तुम अमावस्या की रात को मेरे साथ चलना। वसई के लिए एक यात्रा के लिए पूछें ‘। इति रमेश

अंत में अमावस्या की रात, रमेश उसे भूत दिखाने के लिए फारूक के साथ गया। साढ़े बारह बज रहे होंगे। रमेश जानबूझ कर कार चला रहा था। भूत पुल के पास खड़ा था। जैसा उसने कहा था, उसने हेलमेट पहना हुआ था।

रमेश ने फारूक से कहा

‘नशे में धुत आदमी से बात करने का क्या मतलब है?’

उसने भूत के पास गाड़ी रोक दी। शैतान धीरे-धीरे पास आया। उसकी आँखें लाल और नीली थीं। मानो उसमें खून के थक्के थे। हेलमेट से दाढ़ी की तरह दिखने वाला क्या अजीब था। चेहरा बिल्कुल सहज था।

‘कहाँ रहती है?’

भूत ने पुल के कोने की ओर सिर हिलाया।

‘कब से?’

उसने हाथ उठाया (‘ठीक है, एक दिन पहले!’

‘क्या उसके पास हेलमेट नहीं है?’

उसने पुष्टि की गर्दन हिला दी।

‘फिर भी। अरे बुरा है ‘

जैसे ही फारूक ने रमेश को हाथ से इशारा किया, रमेश कार छोड़कर भाग गया। रमेश को यकीन हो गया था कि फारुख वास्तव में एक ड्रिंग मैन था। वसई में कर्मचारियों को उतारने तक रात के तीन बज चुके थे। वापस लौटने पर, रमेशी ने पुल के घटनास्थल पर पहुंचने पर ट्रेन को धीमा कर दिया।

‘फारूक अपने’ दोस्त ‘की तलाश में!

रात के ट्रक और अन्य वाहन हेडलाइट्स के प्रकाश में, फारूक अपनी आँखों को फाड़ रहा था। वह कहीं भी भूत को नहीं देख सका।

अब रमेश को एक और तनाव था। रमेश को अब लगने लगा था कि फारूक विरार में लंबी सैर करेगा और नहीं मिलेगा।

लेकिन हुआ इसके विपरीत। हालाँकि फारूक एक ड्रामेबाज़ था, लेकिन वह भूतों के ‘पूरे दो’ में विश्वास करता था। वह रमेश-सुरेश की तुलना में अधिक उत्साह से भूत की यात्रा की कहानी बताने लगा। इसका नतीजा यह हुआ कि रमेश सुरेश को छोड़कर किसी को भी अब वसई विरार के चक्कर लगाने पड़े। सब लोग बहुत ज्यादा डर गए थे।

उसके बाद, अगर रमेश और सुरेश फाउंटेन के पास से गुजर रहे थे, तो उन्हें स्मृति में दो वड़े खरीदने होंगे। (यदि पिकअप ड्रॉप स्टाफ कार में है और भूत दिखाई देता है, तो वाहन केवल चलाएगा और बस में एक भूत दिखाएगा।) भूत के पास ट्रेन रोकें या यू-टर्न लें और उसे कॉल करें।

हेलमेट पहने एक भूत था। लाल, झुर्रीदार आँखें, निर्विकार चेहरा।

‘आप कुछ भी खाते हैं?’

भूत अपने हाथ उठाना चाहते हैं। रमेश अपने हाथों पर दो वड़ा डालते थे।

आ जाओ, बैठ कर खाओ। हेलमेट उतारो। ‘

पुल के अंत में, उन्होंने एक काली प्लास्टिक शीट बनाई। भूत बस में या उससे बाहर खिसक जाता। फिर उसने हेलमेट निकाला और रोटी खाई।

खाओ और अभी सो जाओ। बहुत देर हो चुकी थी कल मिलते हैं ‘ रमेश चिल्लाया।

रमेश ने भूत को हाथ दिखाया और लहराया। कभी-कभी मूड होता तो भूत हाथ उठा देता और रमेश ‘साहब’ खरीद लेता।

अब रमेश की यात्रा – सुरेश की लम्बी-चौड़ी पिक – अप दृढ़ हो गई थी। उन्होंने शैतान को अचल संपत्ति में भागीदार बनाया था। दिनों के लिए, इस पागल आदमी ने उसके समान एक हेलमेट पहना था। उन्होंने किसी भी सवाल का लगातार जवाब नहीं दिया। अपने व्यवहार का अध्ययन करने के कुछ दिनों के बाद, रमेश और सुरेश ने कार्यालय में भूतों की अफवाह फैला दी। धीरे-धीरे वे सफल हुए। फारूक ने आखिरी प्रमाण पत्र दिया।

रमेश उसके गाल पर मुस्कुराया। अपनी स्मार्ट शुरुआत से खुश, कार ने बोरीवली को मारना शुरू कर दिया। हर कोई कार्यालय जाना चाहता था और सभी को बताना चाहता था कि भूत अभी भी था। हमेशा की तरह।

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Story of Clever Thief

Once a thief entered the state, this thief was committing a lot of thieves in the state. Everyday there were thieves. The king was very upset and upset, the king called his minister to himself and asked him to find out about this thief.

The one who is harassing and robbing the citizens of our state, the minister made the guard very strict and sent the soldiers to find the thief but even after finding a lot, the thief was not detected. Called and asked if the thief was caught

The minister said that we have not received any information about the thief yet, after a few days, the citizens reached the king and he complained that the king is also committing burglaries in our house every day, slowly all the people got upset stealing. The thief who was doing it was not being caught at all, then the king called the minister and said that within 2 days, catch the thief or else everyone will get punished. The minister got scared and the thief Laid a trap which the soldiers in the town went begun corpse so that the thief is caught ever come

Now the thief could not be caught, it was announced in the state that if the thief himself comes before the king he would not get any punishment and if he was caught he would be sentenced and the next day the thief came to that court and Said that I am a thief, then the king said that you steal so cleanly, no one could catch you, so if I give you a lot of money then you have to stop stealing. The king obeyed and the thief got a lot of money. The thief went away with money and he never committed theft.

King’s wealth hindi story

Raja, why are you feeling upset, if you tell us your problem then some solution can be found out, the king says that we have a room for a long time, there is a box in it, it is locked, we Want to open it, but his key is not being found anywhere, we searched a lot but could not find the key, now we want to open it, but it is not opening, then the commander says that we break that lock Giving, then b L will,

But the king says that we can also earn this, but we know that if this happens, then it can also happen that the stuff in it can break, so we have not done this work yet, this then Trouble has been told, because the box cannot open now, the king says that we have to find that key, only then it can be done, after some time a soldier comes to the commander, he says that Some people have come to us and they say that in their house Not stolen

The commander says that we are coming to them right now, the king says that you should solve the problem of those people, after that, you have to find the key. The commander talks to those people, they show that the thief would steal all the houses Hai, he opens all the locks comfortably. Hearing this, the commander goes to the king. He says that a thief has come to our city. He is stealing everywhere, but he is very fast. He locks all the locks comfortably. Gives ,

Hearing this, the king says that the thief should be caught soon. The general wanted to catch the thief soon. After a few days that thief was caught. The king meets him. You can get punishment for stealing everywhere. Still, the commander is stealing, the king comes to the king. He says that this thief can open the box. Hearing this, the king says that you are right, the king tells the thief that you have to open this box. That thief Says if i open it then i’m left

Hearing this, the king says that you are a thief, you have been harmed, but you cannot be left out, but the king also wanted to know what could be the case. The king believes the thief, the thief opens it, the king sees Is, that there were too many enemies in it, the king leaves the thief, all the people are harmed by the king, because they got so much money, they did not know for a long time what was kept in it.

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Very Interesting Story of Turtle

A turtle named Kambugriva lived in a pond. Two swans who came daily in the same pond, named Sankat and Vikat, were his friends. The three had so much affection that they used to meet and talk with great love till evening.

After a few days, the pond started drying up due to lack of rain. Seeing this, the swans were very sympathetic to the turtle. The turtle too said with tears in his eyes- “Friends, now my life is not long. My death is certain in this pond without water.
If you can find a solution, do it. Patience is only useful in disaster. All the effort is proved by diligence. “After much thought both the swans decided that they would bring a bamboo stick from the forest.

The tortoise will catch the middle part of that rod with its face. Then we will hold the rod firmly on both sides and fly to the edge of the other pond.

After this determination, both the swans said to the turtle – “Friend, we will take you flying to another pond like this, but take care of one thing. Do not leave the wood somewhere in between, otherwise it will fall. Whatever it may be, maintain complete silence.

Do not pay attention to temptations. This is your chance to test. “The turtle assures him that he will not speak at all during this time. Then the swans lift the wood. The turtle holds him firmly from the middle part.

In this way, according to the definite plan, they were flying in the sky that the turtle bowed down and saw the citizens who were raising their necks and making noise out of sight seeing a circular object flying among the swans in the sky.

Hearing their noise, the Kumbgriva turtle tried to ask the swans – “How is this noise ….” But when he opened his mouth, he fell down and died.

Tittihari told this story to Titihera- “That is why I say that a person who does not follow the opinion of his thinkers gets destroyed.

Apart from this, the same intelligent are successful in the wise, who think in advance without any trouble and they are also successful in the same way, whose intellect immediately thinks of its own defense. But whatever happens. Those who say ‘will be seen’ are soon destroyed.

“Tithihera asked-” How he? “Tithihari said-” Hear me tell. “Saying this he told this story to Tittihera.

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JAISI KARNI VAISI BHARNI

There used to be a poor farmer named Haridutt in a village. One day, in his midday, lying in his field under the shade of a tree, he saw a snake sitting on a bill nearby.

He started thinking on seeing the snake. Of course this is my area deity, I never worshiped it, then my cultivation dries up. Now I will worship it every day.

Thinking this he went to his house and brought milk in a vessel to someone and went to the bill and said – “Kshetrapal! I have not worshiped you till date ignorantly. Today I have come to know. Accept the offering of worship and my past crimes Please forgive.

“Saying this, he left the pot of milk there and came to his house. The next day when he went to his field, he saw that the snake had drunk milk and there was a gold posture in the vessel.

The farmer was very happy to see this. After this, every day he started getting a gold currency instead of milk. One day Haridutt had to leave the village for any necessary work.

He entrusted the task of keeping milk for the snake to his boy. The boy went in the evening and kept milk with Bill in the same way. The next day, when he went there, he saw the Golden Madra in the vessel.

He thought that it might not happen, this snake’s body is full of gold-coins, why not kill it and take all the gold coins. Thinking this, he raised the stick and missed its target as soon as it tried to kill the snake.

Then the snake in anger got bitten by Haridutt’s son, which led to his immediate death there. On the second day when Haridutt came back, he heard the account of the son’s death from his relatives and said – “The son has received the fruits of his actions.”

A person who does not take pity on the people who have come to his shelter, his work is spoiled, like the work of swans in Padmasarovar has deteriorated.

“The Swans asked-” How he? “Then Haridutt told him this tale of swans.

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